* हम दुनिया को या जीवन के प्रत्येक कर्म को जैसा देखते हैं , हमें वैसा ही दिखाई देने लगता है , अर्थात अगर हमें लगता है , कि प्रत्येक घटना या कर्म की रचना हम ही कर रहे हैं , तो बिल्कुल हमें वैसा ही नज़र आने लगता है , जबकि अगर हम अपने जीवन की हर घटना और कर्म को ईश्वर के निर्देश से घटित होता हुआ देखते हैं , तो निश्चित ही हमें हर घटना या कर्म में ईश्वर की ही झलक दिखाई देने लगती है * । अनमोल वचनः जिस प्रकार दवा का रोज सेवन करने पर बीमारी चली जाती है , उसी प्रकार प्रभु का सिमरन करते रहने पर सँसार की आसक्ति व वासनाएँ आहिस्ते आहिस्ते घटने लगती है और मन मुक्त होने लगता है , इसलिए रोज प्रभु सिमरन करो , साँसों का कोई ठिकाना नही है , साँस छूटे उससे पहले ही सिमरन कर खुद को धन्य कर लो , प्रभु को खुद को सौंप दो , निश्चित ही आपका कल्याण होगा ... .. ओम् शान्ति
Peace of Mind
"Supreme Soul" to refer to God. They see God as incorporeal and eternal, and regard him as a point of living light like human souls, but without a physical body, as he does not enter the cycle of birth, death and rebirth.